*🌷निश्छल प्रेम🌷* हर खबर पर पैनी नजर, (IPN) इंडिया पब्लिक न्यूज।

एक बार श्री कृष्ण के पेट में भयानक दर्द हुआ ।वैद्यों के इलाज से भी आराम न मिलने पर उन्होंने अपनी रानियों को पूछने पर बताया कि यदि उनका कोई प्रेमी अपने चरणों की धूल उन्हें खाने को दे दे तो ही दर्द ठीक होगा।

रानियों ने सोचा कि हम प्रभु को कैसे अपना चरण रज दें ; इससे तो हमें घोर नर्क मिलेगा और सभी ने इनकार कर दिया और प्रभु से कोई रास्ता पूछा।

प्रभु ने वृंदावन जाने को कहा।
उद्धव जी भेजे गए।
मथुरा का ध्वज देख गोपियाँ दौड़ पड़ी और उद्धव जी को छू कर पूछा कि क्या आपको कान्हा ने भेजा है ।

क्या हाल है कान्हा का…?

उद्धव जी ने उनके पेट दर्द और उसका इलाज बताया

तुरंत ही सभी गोपियाँ अपनी अपनी ओढ़नी फाड़ कर उसमे चरण रज भर के देने लगी।
सैकड़ों गठरियाँ इकट्ठा कर लीं।उद्धव जी को दिया ।

गठरी लेकर वापस आने से पहले बोले की — हे गोपियों ! क्या तुम लोग जानती हो कि प्रभु को चरण रज देने से कितना पाप होगा । घोर नर्क मिलेगा।

गोपियाँ बोली- हे उद्धव जी ! हम स्वर्ग नर्क नहीं जानते।

हम बस इतना जानते हैं कि हमारे कान्हा घोर दर्द में है और उनका इलाज हमारे चरणरज में है;
वो ठीक हों जायेंगे तो इसके लिए यदि हमें अनन्त काल तक नर्क की आग में जलना पड़े तो भी हमें सहर्ष स्वीकार है।

हमे तो अपने कान्हा का मुस्कराता चेहरा देखने की कीमत पे करोडो जन्म का नर्क मंजूर है। आप तुरंत जायें और हमारे कान्हा का इलाज करें।

ये कह के उद्धव जी को विदा कर दिया।

ऐसा है अगाध ” निश्छल प्रेम ” गोपियों का – श्री राधा जी का ।

श्रीमन नारायण 👣🪷👏 जय श्री राम, राधे राधे, जय मां भवानी, जय श्री कृष्णा

Related posts

Leave a Comment